रचनासामान्य

सीता स्तुति

📅 October 13, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 17 views 💬 1 comments

सीता स्तुति

 

जयति जयति जय जनक दुलारी,

करुणा-सागर प्रीत पुजारी।

राम-प्रिया, रघुवर की छाया,

मिटे नाम से विपदा सारी।

……..जय मां सीता जनक दुलारी,

 

जन्म धरा से, प्रकृति अधीना,

त्याग-प्रेम में परम प्रवीना।

राज त्याग कर चली राम संग,

वन-वन सह ली विपदा भारी॥

……..जय माँ सीता जनक दुलारी॥

 

रहीं अशोक वाटिका में थिर,

राम-नाम में मन था स्थिर।

नारि-धर्म का ध्वज लहराया,

रावण हारा, लंका हारी॥

……..जय माँ सीता जनक दुलारी॥

 

लव-कुश की वनदेवी अंबे,

जय जय कृपामयी जगदम्बे।

माँ की छाया जग से न्यारी,

हम सब आए शरण तुम्हारी॥

…….जय माँ सीता जनक दुलारी॥

 

मर्यादा की अमर कहानी,

जो नित नूतन परम पुरानी ।

नमन करें चरणों में तेरे,

वैदेही की महिमा न्यारी॥

…….जय माँ सीता जनक दुलारी॥

श्रीकांत त्रिवेदी “प्रांजल”

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1 टिप्पणियाँ

सभी पाठकों और रचनाकारों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ

  1. Swadha Ravindra

    बहुत ही सुंदर वंदना लिखी है भैया।

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