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काव्य और गद्य की प्रमुख साहित्यिक विधाओं में से अपनी पसंद की विधा चुनिए और उस विधा की रचनाएँ पढ़िए।
काव्य विधाएँ
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हर बार कुछ नया खोजिए—एक संकेत से रचना शुरू करें, अपनी प्रोफ़ाइल सँवारें, दूसरे लेखकों को पढ़ें और साहित्यिक गतिविधियों में भाग लें।
“आज लिखी गई आपकी एक पंक्ति, कल किसी पाठक के मन में अपना घर बना सकती है।”
यह केवल एक वेबसाइट नहीं, आपकी अपनी साहित्यिक पहचान का घर है।
आप जो लिखते हैं, वह केवल शब्द नहीं होते—उनमें आपका अनुभव, आपकी संवेदना, आपकी दृष्टि और आपका व्यक्तित्व बसता है। साहित्य संजीवनी उसी सृजन को एक अपना स्थान देने की कोशिश है।
यहाँ आपकी अपनी लेखक प्रोफ़ाइल होगी, आपकी रचनाएँ आपके नाम से सुरक्षित रहेंगी, पाठक आपको पढ़ेंगे, दूसरे लेखक आपसे जुड़ेंगे, आपको Follow करेंगे और आपकी साहित्यिक यात्रा को पहचान मिलेगी।
हम चाहते हैं कि जब आप यहाँ आएँ, तो आपको ऐसा न लगे कि आप किसी और के मंच पर आए हैं। आपको लगे—यह मेरा साहित्यिक पृष्ठ है, मेरी रचनाओं का घर है और मेरे पाठकों से मेरा सीधा संवाद है।
आप कविता लिखते हों, कहानी, संस्मरण, ग़ज़ल, लेख, यात्रा-वृत्तांत या किसी और विधा में सृजन करते हों—यहाँ आपकी आवाज़ के लिए जगह है।
क्योंकि साहित्य संजीवनी में केवल रचनाएँ नहीं जुड़तीं—लेखक, पाठक और पहचान एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
आप लिखते रहिए, यह मंच आपकी रचनाओं को उनका अपना घर देता रहेगा।
— संपादकीय मंडल, साहित्य संजीवनी
चुनिंदा पद्य रचनाएँ
लय, भाव और काव्यात्मक अभिव्यक्ति से चुनी गई रचनाएँ—इस खंड की सामग्री गद्य खंड में दोहराई नहीं जाएगी।
दीये की लौ
एक छोटी-सी लौ के बहाने आशा, उत्तरदायित्व और मनुष्य की जिजीविषा पर एक प्रदर्शन-कविता।
पूरी रचना पढ़ें→चुनिंदा गद्य रचनाएँ
कथ्य, विचार और अनुभव-प्रधान गद्य—पद्य खंड से पूरी तरह अलग चयन।
दादी की अलमारी
पुरानी अलमारी, चंद चिट्ठियाँ और स्मृतियों की वह गंध जो समय बीतने पर भी घर में बनी रहती है।
पूरी रचना पढ़ें→बारिश के बाद की सड़क
एक छोटी लघुकथा—जहाँ शहर की भीगी सड़क दो अनजान लोगों के बीच मानवीयता का पुल बनती है।
पूरी रचना पढ़ें→घाटों पर उगती सुबह
नदी, आरती के बाद का मौन और सुबह की पहली नाव—एक संवेदनशील यात्रा-वृत्तांत का नमूना।
पूरी रचना पढ़ें→भाषा का घर
भाषा को केवल संप्रेषण नहीं, स्मृति, संस्कार और सामूहिक अनुभव के घर की तरह देखने वाला लघु निबंध।
पूरी रचना पढ़ें→बादल की जेब
कल्पना और प्रकृति को जोड़ती बच्चों के लिए एक छोटी, कोमल कथा।
पूरी रचना पढ़ें→इस महीने का रचनाकार
हर महीने एक विशेष साहित्यिक व्यक्तित्व—संपादकीय चयन या मंच की स्वचालित लेखक-चयन प्रणाली से

संपादकीय विशेष साहित्यिक चयन
अशोक चक्रधर
हिन्दी की वाचिक परंपरा में अशोक चक्रधर वह सर्जक हैं जिनके यहाँ हास्य केवल ठहाका नहीं, सामाजिक बोध की चमक बन जाता है। कविता, व्यंग्य, आलोचना, नाटक, पटकथा, रेडियो-टेलीविज़न और भाषा-तकनीक—इन अनेक क्षेत्रों में उनकी सक्रियता हिन्दी अभिव्यक्ति को मंच से माध्यम और माध्यम से नई तकनीक तक ले जाती है।
यह साहित्य संजीवनी की संपादकीय प्रस्तुति है, लेखक की आधिकारिक प्रोफ़ाइल नहीं। चित्र का श्रेय और स्रोत विशेष पृष्ठ पर दिया गया है।क्या आपकी कलम में भी एक कहानी है?
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शब्दों से जुड़े, सृजन से निखरें।
