रचनासामान्य

राधा स्तुति

📅 October 14, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 28 views 💬 1 comments

 

प्रीत की रीत सिखा कर जग को,

प्रेम सुधा बरसा गई राधा!

 

कृष्ण के गोकुल आने से पहले,

बरसाने में आ गई राधा!

 

जब तक सम्मुख कृष्ण न हो तो,

जग से नयन छुपा गई राधा !

 

प्रेम में कर सर्वस्व समर्पण,

देह से नेह भुला गई राधा!

 

मुरलीधर की मुरली की धुन ,

सुन सब कुछ बिसरा गई राधा!

 

अपनी पायल की रुनझुन पर,

कृष्ण को नाच नचा गई राधा !

 

यमुना तट पर गोपियों के संग,

कृष्ण से रास रचा गई राधा!

 

सह सौ वर्ष वियोग,गुपाल को,

द्वारकाधीश बना गई राधा!

 

प्रेम में कृष्ण बने राधा तो,

ख़ुद को कृष्ण बना गई राधा!

 

गोपी ताल में तज निज देह को,

कृष्ण में जा के समा गई राधा!

 

कृष्ण अधूरे बिन राधा के,

कृष्ण को पूर्ण बना गई राधा!!

 

श्रीकांत त्रिवेदी “प्रांजल”

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1 टिप्पणियाँ

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  1. Swadha Ravindra

    कृष्ण में जा के समा गई राधा अद्भुत

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