गीतसामान्य

जयति जय सरस्वती

📅 October 8, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 18 views 💬 1 comments

जयति जय सरस्वती,विश्व-विमल-भारती,

वीणिका-विनोदिनी, भाव को सँवारती।

मंजुल मराल श्वेत, आसन मृणाल मंजु ,

वल्लकी सुमन्द स्वर,साज को सँवारती।

 

जयति जय सरस्वती,विश्व-विमल-भारती,

वीणिका-विनोदिनी, भाव को सँवारती।

 

ज्ञानमयी भारती, दिव्य ज्योति धारती,

मोह-तम-निकन्दिनी, चेतना प्रसारती।

शुभ्र वसन धारिणी, कुन्द-किरण-हासिनी,

वेद-ऋचा माधुरी , लोक में प्रसारती।।

 

जयति जय सरस्वती,विश्व-विमल-भारती,

वीणिका-विनोदिनी, भाव को सँवारती।

 

ज्ञान-दीप-दायिनी, मोह-तम-विनाशिनी ,

शब्द-शक्ति-साधिनी,बुद्धि को निखारती।

वेदिका-विलासिनी,काव्य जग प्रकाशिनी,

सत्य-सुधा-सींचकर, चेतना सँवारती॥

 

जयति जय सरस्वती,विश्व-विमल-भारती,

वीणिका-विनोदिनी, भाव को सँवारती।

 

शुभ्र-वसन-धारिणी,दिव्य-गुण-विहारिणी,

भक्त-हृदय-मन्दिर में प्रेम को प्रसारती।

मातु वरदायिनी, सिद्धि-सुख-प्रदायिनी,

करुणा-कटाक्ष से, भाग्य को सँवारती॥

 

जयति जय सरस्वती,विश्व-विमल-भारती,

वीणिका-विनोदिनी, भाव को सँवारती।

……..श्रीकांत त्रिवेदी “प्राञ्जल”

 

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