रचनासामान्य

द्वादस ज्योतिर्लिंग

📅 October 13, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 15 views 💬 1 comments

द्वादश ज्योतिर्लिंग

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काशी ही मधुवन हो जाए,

विश्वनाथ धड़कन हो जाए

नयनों में उज्जैन बसे तो,*

सन्यासी ये मन हो जाए!

सोमनाथ का करें स्मरण,*

मल्लिकार्जुन तन हो जाए!

ममलेश्वर का ध्यान करें,

वैद्यनाथ आंगन हो जाए!

भीमाशंकर के दर्शन हों,

*नागेश्वर तपवन हो जाए!

त्रयंबकेश्वर हों नयनों में,

घुश्मेश्वर अंजन बन जाए!

रामेश्वर में राम मिलें तो,*

रज केदारधाम बन जाएं!!

श्रीकांत त्रिवेदी “प्रांजल”

श्रीकांत त्रिवेदी “प्रांजल “

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1 टिप्पणियाँ

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  1. Swadha Ravindra

    वाह वाह वाह

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