रचनासामान्य
गणपति वंदन

हे गौरी सुत,हे गणनायक!
शंकर सुवन,नमामि विनायक!!
हे प्राणेश्वर,ऋद्धि सिद्धि के,
कुशल,क्षेम,मंगल के दायक!!
हे गौरी सुत,हे गणनायक !
हे गज आनन, मंगल मूरत,
भक्तजनों के दुःख विनाशक!!
हे मोदक प्रिय, हे लम्बोदर,
कृपा करो, हे बुद्धि प्रदायक!!
हे गौरी सुत,हे गणनायक !
हे विघ्नेश्वर ,विघ्न विनाशक,
कष्ट हरो जय जय सुखदायक !!
आर्त जनों पर दया करो प्रभु,
मृत्युंजय सुत, मुक्ति प्रदायक!!
हे गौरी सुत,हे गणनायक !
वक्रतुंड, हे महाकाय प्रभु,
कोटि सूर्य सम, हे गण नायक!
शीश नवाते हम चरणों में,
भक्ति दान दो भक्ति प्रदायक!!
हे गौरी सुत,हे गणनायक !
हे गौरी सुत,हे गणनायक!! !
….श्रीकांत त्रिवेदी, ,”प्राञ्जल”लखनऊ















