दोहासामान्य
सूर्य स्तुति

सूर्य चरण में शीश धर,करे सकल जग ध्यान।
जयति प्रभाकर देवता, दें प्रकाश का दान।।
नाश करें आदित्य तम , भानु करे उजियार।
ज्योति किरण का सेतु दे,करते भाव से पार।।
छाई रवि की अरुणिमा, करें दिवाकर राज्य ।
रजनी की तम कालिमा का, मिटता साम्राज्य।।
मित्र सखा बन साथ दे, पार करे मझधार।
पूषा सत्पथ पर सदा, दें पावन उजियार।।
सविता गति दे प्राण को, सृजन बने गतिमान।
अश्वतरी लेकर चले, अरुण रथी बलवान।।
देव प्रभाकर भास्कर, कण-कण करे प्रबोध।
मार्तण्ड हम सभी को , करते सत उद् बोध।।
विवस्वान को कर नमन् ,जीवन के आधार।
जिनके कृपा प्रसाद से, हो जग का उद्धार।।
श्रीकांत त्रिवेदी “प्रांजल”











