गीतसामान्य

हम नए थे कहानी पुरानी रही !

📅 October 9, 2026 ⏱ 2 मिनट ◉ 14 views 💬 0 comments

 

अपने हिस्से में बस आँसुओं के सिवा,

और कोई न बाकी निशानी रही।

हम नए थे, कहानी पुरानी रही !

 

 

चूड़ियाँ पावनी थीं हमारे लिए,वो तुम्हारे लिए काँच का वृत्त थी।

सात वचनों के बंधन, तुम्हारे लिए, अक्षरों की कोई मात्र आवृत्ति थी।

देहरी के किसी दीप जैसे थे हम,उम्र भर बस प्रतीक्षा में जलते रहे।

भावनाओं के कितने ही ऊँचे शिखर,मोम के जैसे मन में पिघलते रहे।

 

भूमिका इस कथानक में अपनी यही,

जिसका राजा नहीं,ऐसी रानी रही।

हम नए थे, कहानी पुरानी रही !

 

एक विश्वास था, लौट आओगे तुम,हमने भावों के बंधन ये तोड़े नहीं,

मन का मंदिर बिना इष्ट सूना रहा,किन्तु उपवास व्रत हमने छोड़े नहीं।

आरती के दिए से जली उँगलियाँ, कौन से देव से अपनी पीड़ा कहें ?

कोई अपने हृदय से ये कैसे कहे, घाव हमने हृदय पर हैं कितने सहे ?

 

कितना कुछ अनकहा, अनसुना रह गया,

बात कितनी ही बाक़ी बतानी रही।

हम नए थे, कहानी पुरानी रही !

 

आँकलन का गणित हमको आया नहीं, दोष देते नहीं हम तुम्हारा कोई,

ये हुआ होगा शायद हमारे लिए,भाग्य लिखता रहा भाग्यहारा कोई।

प्रेम गिनता नहीं,क्या दिया क्या लिया, साध्य होती है अपनी स्वयं साधना,

तुमने अभिशाप हमको लिखे हैं मगर, लिख रहे हम तुम्हे सिर्फ़ शुभकामना।

 

जो तुम्हे सौंप दी,शाम उस उम्र की,

हाय हमको अकेले बितानी रही।

हम नए थे, कहानी पुरानी रही !

 

Swarika Kirti ✍️

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