गीतसामान्य

गीत पायल से छनकना चाहते हैं !

📅 October 9, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 12 views 💬 0 comments
अनसुना इक राग छेड़ा ज़िंदगी ने,
पाँव इस धुन पर बहकना चाहते हैं !
             शब्द सारे घुँघरुओं से हो रहे हैं ,
             गीत पायल से छनकना चाहते हैं !
स्वप्न सारे रख दिए थे बंद जिनमें,
वो सभी संदूक फिर से खुल रहे हैं
रंग सातों आसमानों से उतर कर ,
इन लकीरों में हमारी घुल रहे हैं,
मौसमों की हो गई रंगत बसंती,
       फूल सारे फिर महकना चाहते हैं !
ज्यों नदी कोई किसी युग की तपन को,
दे कोई वरदान, आकर सींचती है,
सागरों में ये उमड़ते ज्वार क्या हैं ?
चांदनी ज्यों डोरियों से खींचती है ,
कंगनों के रंग गुलाबी हो गए हैं,
      ख्वाब सारे फिर खनकना चाहते हैं !
तितलियों से पंख मन को लग गए हैं,
गुनगुनाती हैं हमारे संग हवाएँ,
ज्यों कोई उजली किरण उतरी हृदय में,
यूँ  सुनहरी हो गई हैं कल्पनाएँ,
झूमकर देकर दुआएँ आँगनों को
        मखमली बादल बरसना चाहते हैं !

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