नई प्रकाशित रचनाएँ यहाँ नई प्रकाशित रचनाएँ सबसे पहले दिखाई देती हैं। रचना पढ़ने के लिए उसके चित्र या शीर्षक पर क्लिक करें। रचनाकार के नाम से उसकी प्रोफ़ाइल खुलती है। प्लेसीबो इफ़ेक्ट सीमा मधुरिमा मेरा बदनाम हो जाने का दिल है स्वधा रवीन्द्र उत्कर्षिता पहले जहाँ रहा करता था स्वधा रवीन्द्र उत्कर्षिता जिसके दिल का मकान छोटा है प्रगीत कुँअर हम भी इक किरदार साथी, तुम भी इक किरदार हो स्वधा रवीन्द्र उत्कर्षिता गीत अकिंचन रहे हमारे स्वरिका कीर्ति आवरण प्रेम का अब चढ़ाओ नहीं स्वरिका कीर्ति गीत स्वरिका कीर्ति मुझको प्यार न देना झुमके बाली सा स्वरिका कीर्ति लड़कियाँ अब भाग्य से संग्राम करना जानती हैं स्वरिका कीर्ति भागने को हार ही मैं मानती हूँ… स्वधा रवीन्द्र उत्कर्षिता जाने किसकी ठौर रुकेगा मेरा भोला मन…… स्वधा रवीन्द्र उत्कर्षिता फिर से तुमको प्यार लिखा है! स्वरिका कीर्ति जीवन तो इक मकड़ जाल है…… स्वधा रवीन्द्र उत्कर्षिता ← पिछला1…456