ग़ज़लसामान्य

जिसके दिल का मकान छोटा है

📅 September 18, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 24 views 💬 1 comments

जिसके दिल का मकान छोटा है

उसको   सारा   जहान  छोटा  है

कैसे  खोलूँ मैं  पंख ख़्वाबों के

नींद  का  आसमान  छोटा  है

मान  बैठे   बड़ी  समस्या  हम

जबकि उसका निदान छोटा है

हमने  घर   में  रखी  वो  दीवारें

जिनका सुनने का कान छोटा है

वो  ही  ज़्यादा  ग़ुरूर  रखते  हैं

जिनमें अनुभव का ज्ञान छोटा है

चोट गहरी बहुत है भीतर तक

माना  ऊपर  निशान  छोटा है

-प्रगीत कुँअर

1 टिप्पणियाँ

सभी पाठकों और रचनाकारों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ

  1. Swadha Ravindra

    वाह वाह वाह। माना ऊपर निशान छोटा है। 🌻🌻🌻

    Report comment

Comments बंद हैं।

इसी लेखक की और रचनाएँ

रचनाकार की अन्य प्रकाशित कृतियाँ