गीतसामान्य

भगत का मन जानें भगवान

📅 October 20, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 24 views 💬 1 comments

खुली ललक से बन्द पलक तक सब-कुछ लेते जान
भगत का मन जानें भगवान
सत्य-मिथक से श्लेष-यमक तक तनिक नहीं अन्जान
भगत का मन जानें भगवान

कौन से पथ पर भटक रहा है
किस को क्या-क्या खटक रहा है
हवा-हवा में उड़ता पक्षी
पड्ख किस लिए फटक रहा है

किस का क्या है ध्येय-प्रयोजन सब की उन को पहचान
भगत का मन जानें भगवान

किस झरने का पानी पावन
क्यों लगता किस को मन-भावन
इस की तपन शरद क्यों उस को
स्वेद किसी का किस का साधन

सब के सावन का भादों का उन को है ऋतु-ज्ञान
भगत का मन जानें भगवान

इच्छित और अनिच्छित जो है
निश्चित और अनिश्चित जो है
पृथक-पृथक क्यों भाव हैं सब के
और भावना मिश्रित जो है

विलग-विलग रहने वाले क्यों गाते हैं सह-गान
भगत का मन जानें भगवान

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’
लखनऊ।

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💬 Comment 1
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1 टिप्पणियाँ

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  1. भगत का मन जाने भगवान। इस गीत को गाकर अपना वीडियो बना कर उसका यू ट्यूब लिंक भी साझा कीजिये भैया।

    अद्भुत लेखन।

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