मनीष कुमार शुक्ल 'मन'

★ Founder Member · SS-FM-023

कार्य-क्षेत्र: स्व-रोजगार व शिक्षा-दीक्षा

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मनीष कुमार शुक्ल 'मन'
मनीष कुमार शुक्ल 'मन'
04-10-2026
SS-FM-023
साहित्य संजीवनी
साहित्य संजीवनी — A Literary Community for Writers and Readers. संस्थापक सदस्य सम्मान-पत्र। यह प्रमाणित किया जाता है कि मनीष कुमार शुक्ल 'मन' को साहित्य संजीवनी के प्रथम 25 सदस्यों में सम्मिलित होने पर Founder Member के रूप में सम्मानित किया जाता है। साहित्य, सृजन और हिन्दी लेखन समुदाय को समृद्ध बनाने में आपके प्रारम्भिक सहयोग, विचारों और सक्रिय सहभागिता के लिए हम हृदय से हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। आपकी रचनात्मक यात्रा प्रेरणादायी बनी रहे। तिथि 04-10-2026। प्रमाण-पत्र क्रमांक SS-FM-023। संस्थापक / प्रशासक साहित्य संजीवनी।
रचनाकार परिचयमेरे बारे मेंपरिचय देखें
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परिचय

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मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ समकालीन हिन्दी और समान रूप से उर्दू साहित्य-जगत में सक्रिय रचनाकार, कवि एवं साहित्यिक अभिरुचि के संवेदनशील हस्ताक्षर हैं। उनकी रचनाधर्मिता में गीत, ग़ज़ल, छन्दबद्ध काव्य तथा समकालीन संवेदनाओं से जुड़ी कविताओं का विशेष स्थान है। उनकी रचनाओं में प्रेम, मानवीय संवेदना, जीवन-संघर्ष, सामाजिक सरोकार, प्रकृति, राष्ट्रबोध और समय की बदलती प्रवृत्तियों के विविध रंग दिखाई देते हैं।
‘मन’ की काव्य-भाषा में हिन्दी की सहजता के साथ उर्दू की रवानी और शायरी की नफ़ासत का सुंदर मेल दिखाई देता है। वे शब्दों के केवल भावात्मक प्रयोग तक सीमित न रहकर छन्द, बहर, क़ाफ़िया, रदीफ़ और लय की शास्त्रीय कसौटियों के प्रति भी सजग दिखाई देते हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में भाव और शिल्प का संतुलन प्रमुख विशेषता के रूप में उभरता है।
उनकी ग़ज़लों में प्रेम और विरह के पारम्परिक भावों के साथ जीवन की वास्तविकताओं की छाप मिलती है, वहीं गीत और छन्दबद्ध रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक चेतना, प्रकृति और सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। उनकी लेखनी का एक उल्लेखनीय पक्ष यह भी है कि वे गंभीर साहित्यिक संवेदना को अपेक्षाकृत सहज और संप्रेषणीय भाषा में व्यक्त करने का प्रयास करते हैं।
मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ साहित्य-सृजन के साथ साहित्यिक गोष्ठियों एवं काव्य आयोजनों के सक्रिय सहभागी और संचालक भी हैं। लखनऊ की साहित्यिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय उपस्थिति रही है तथा वे साहित्यकारों को जोड़ने, रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने और साहित्यिक आयोजनों को गरिमापूर्ण ढंग से संचालित करने में अपनी भूमिका निभाते हैं। आदर्श साहित्य परिषद्, बंगला बाज़ार, लखनऊ की साहित्यिक गोष्ठियों से भी उनका सक्रिय जुड़ाव रहा है।
समग्रतः मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ ऐसे रचनाकार हैं जिनके लिए साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदना, सौन्दर्य, शिल्प और सामाजिक चेतना को एक साथ साधने की सतत प्रक्रिया है। अपनी विशिष्ट शब्द-संवेदना, छन्द एवं ग़ज़ल के प्रति अनुराग तथा साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के माध्यम से वे समकालीन हिन्दी साहित्य में अपनी पहचान को निरन्तर विस्तार दे रहे हैं।
साहित्य-सृजन और साहित्य-सेवा—दोनों को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले, लखनऊ के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ जी से आज हम परिचित होने जा रहे हैं। गीत, ग़ज़ल और छन्द के क्षेत्र में उनकी सृजनशील उपस्थिति निरन्तर बनी हुई है। शब्दों की संवेदना को मंच की गरिमा और प्रस्तुति की सहजता देने में उनका सधा हुआ संचालन-कौशल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। साहित्यिक आयोजनों को प्रवाह, अनुशासन और आत्मीयता के साथ आगे बढ़ाना उनकी विशिष्ट पहचान है।

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