गीतसामान्य

सीता कहाँ हो?

📅 October 11, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 13 views 💬 0 comments

सीता कहाँ हो ह्रृदय है को न धीर।

ढूंढ रहे तुमको रघुकुल के वीर।

देखे ठिकाने सारे, तुम हो कहीं ना

कुंजन न कलियन में अरु ना गलिन मा

आओ प्रिये तुमको ढूँढें सुधीर।

सीता कहाँ हो ह्रृदय है को न धीर।

जैसे बिना माली बगिया है रोए

वैसे लखन भैया लगते हैं खोए

देखो हृदय में लगा आके तीर

सीता कहाँ हो ह्रृदय है को न धीर।

चुभता तमस और चुभती है रात

मौन है पसरा सब है उदास

मरुथल की हिरनी घिरी धारे पीर।

सीता कहाँ हो ह्रृदय है को न धीर।

मन की मछरिया है सूनी उदास

बगिया है रीती रीती नहीं है प्रकाश

नीरज नयन है बिकल अरु अधीर

सीता कहाँ हो ह्रृदय है को न धीर।

 

 

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