रचनासामान्य

अपने

📅 October 6, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 20 views 💬 1 comments

अपने हीं हैं कोई बात नहीं,

कहकर सोई मैं कितनी रात नहीं,

सोचती हूँ, हैं सब अपने फिर क्यों तोड़ते हैं सपने?

दूर करके गलत ठहराकर अगर मिल गई है खुशी,

तो जाने दो ,उन महाशय को खुश हो जाने दो,

किसी को रुलाने में सुख मिलता है और कोई अश्र बहाकर, दुख में ही सुख का आनंद उठा लेता है,

पर अगर फिर भी लगते वो तुम्हे अपने, तो याद कर लेना छोड़ दिया था धूप में उन्होंने तुम्हे तपने |

~कनिका शर्मा 

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1 टिप्पणियाँ

सभी पाठकों और रचनाकारों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ

  1. Swadha Ravindra

    बहुत ही प्यारा लिखा है। खूब लिखो और खूब आगे बढ़ो।

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