ग़ज़लसामान्य
जिसके दिल का मकान छोटा है

जिसके दिल का मकान छोटा है
उसको सारा जहान छोटा है
कैसे खोलूँ मैं पंख ख़्वाबों के
नींद का आसमान छोटा है
मान बैठे बड़ी समस्या हम
जबकि उसका निदान छोटा है
हमने घर में रखी वो दीवारें
जिनका सुनने का कान छोटा है
वो ही ज़्यादा ग़ुरूर रखते हैं
जिनमें अनुभव का ज्ञान छोटा है
चोट गहरी बहुत है भीतर तक
माना ऊपर निशान छोटा है
-प्रगीत कुँअर
1 टिप्पणियाँ
सभी पाठकों और रचनाकारों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ
Comments बंद हैं।
इसी लेखक की और रचनाएँ
रचनाकार की अन्य प्रकाशित कृतियाँ



वाह वाह वाह। माना ऊपर निशान छोटा है। 🌻🌻🌻
Report comment