गीतसामान्य

Geet

📅 October 21, 2026 ⏱ 1 मिनट ◉ 16 views 💬 1 comments

जब भी कभी देह से बाहर जाना होगा
अपना सबकुछ साथ उठाकर ले जाऊंगी

घर से उठा उपस्थिति अपनी हँसती गाती वाणी
साथ लिए जाऊंगी अपनी आधी रही कहानी
ले जाऊंगी आँगन की मिट्टी से अपनी खुशबू
पेड़ो, चिड़ियों से मांगूंगी वापस सभी निशानी

मौन, आहटें, नींद जगाकर ले जाऊंगी
जब भी कभी देह से बाहर जाना होगा

नमी उठा लूंगी तकिये से, और सिसकियों को भी
साथ लिए जाऊंगी मन में यादें जिसकी जो भी
गीत रहेंगे यहीं, गीत का प्राण लिए जाऊंगी
ले जाऊंगी शेष अगर कुछ कथा – कहानी हो भी

जो भी है अनुभूत कमाकर ले जाऊंगी
जब भी कभी देह से बाहर जाना होगा

सब गुण – दोष, आदतें, इच्छा, शौक, बहाना
जगत स्वार्थ का शेष बचे जो कोश – खजाना
ले जाऊंगी सबब शिकायत और नेह का
जाएगा ही साथ सांस के सकल उल्हाना

भावस्रोत सब साथ समाकर ले जाऊंगी
जब भी कभी देह से बाहर जाना होगा।

©Shiva Awasthi

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