मेरी कविता-‘‘पथिक तुम बढ़ते ही जाना’’

बाल्यकाल में जब मैं विद्यालय में पढ़ता था, उस समय मेरे द्वारा यह कविता विरचित की गयी थी, जिसे होशियार पुर से प्रकाशित एक पत्रिका ने प्रकाशित किया था।

💬 Comment 0

टिप्पणियाँ

इस रचना पर अभी कोई टिप्पणी नहीं है।

← सभी वीडियो देखें