हमारे शहर से विश्वपटल तक : गीतांजलि श्री की कथा-यात्रा

अपनी भाषा की किसी पुस्तक को दुनिया के दूसरे हिस्सों में पहचान मिलते देखना मुझे हमेशा सुखद लगता है। लगता है, हमारे जीवन का कोई अनुभव, हमारी स्मृतियों का कोई हिस्सा, दूर बैठे किसी अनजान पाठक तक पहुँच रहा है। गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘हमारा शहर उस बरस’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘Our City That Year’ का वर्ष 2026 के वारविक प्राइज़ फ़ॉर वीमेन इन ट्रांसलेशन की लंबी सूची में शामिल होना मेरे लिए ऐसी ही प्रसन्नता की खबर है। डेज़ी रॉकवेल द्वारा अनूदित यह पुस्तक इस वर्ष चयनित 13 कृतियों में शामिल है।
हिंदी में कितना कुछ लिखा जा रहा है, जिसे दूसरी भाषाओं के पाठकों तक पहुँचना चाहिए। हमारे यहाँ की स्त्रियों का जीवन, परिवारों की बदलती संरचना, छोटे शहरों की बेचैनियाँ और समाज के भीतर पलते अंतर्विरोध—इन सबमें ऐसी कहानियाँ हैं, जिनसे दुनिया का कोई भी संवेदनशील पाठक जुड़ सकता है। इसलिए ऐसी खबरें पढ़कर खुशी के साथ यह इच्छा भी होती है कि हमारी भाषाओं की और अधिक पुस्तकों का अच्छा अनुवाद हो।
वारविक पुरस्कार की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही आवश्यकता को ध्यान में रखकर हुई थी। ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय में शांताल राइट ने वर्ष 2017 में इसकी स्थापना की। उद्देश्य था अनूदित साहित्य में महिला लेखकों की कम भागीदारी की ओर ध्यान दिलाना और ब्रिटेन तथा आयरलैंड के पाठकों तक दुनिया की अधिक महिला रचनाकारों की आवाज़ें पहुँचाना।
यह पुरस्कार प्रतिवर्ष किसी महिला की लिखी ऐसी पात्र कृति के अंग्रेज़ी अनुवाद को दिया जाता है, जिसे ब्रिटेन या आयरलैंड के प्रकाशक ने प्रकाशित किया हो। इसमें कथा साहित्य, कविता, साहित्यिक कथेतर लेखन, बच्चों और किशोरों का कथा साहित्य, ग्राफ़िक उपन्यास तथा नाटक शामिल हो सकते हैं। अनुवादक किसी भी लिंग का हो सकता है। इसकी एक हज़ार पाउंड की राशि लेखिका और अनुवादक अथवा अनुवादकों के बीच बराबर बाँटी जाती है।
मुझे इस बराबरी में एक सुंदर साहित्यिक स्वीकार दिखाई देता है। अनुवादक के सामने शब्दों के साथ उनके भीतर का संसार भी होता है। किसी संबोधन का अपनापन, किसी व्यंग्य की धार और किसी चुप्पी का अर्थ दूसरी भाषा में सँभालना आसान कहाँ होता है। अच्छा अनुवाद पढ़ते समय हम कई बार उस कठिन परिश्रम को भूल जाते हैं, जिसके कारण रचना हमें इतनी सहज लग रही होती है।
गीतांजलि श्री और डेज़ी रॉकवेल की साझेदारी पहले भी हिंदी के लिए गौरव का अवसर बनी है। वर्ष 2022 में ‘रेत समाधि’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘Tomb of Sand’ को इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार मिला था। उसी वर्ष यह पुस्तक वारविक पुरस्कार की संयुक्त विजेता भी रही। अब ‘Our City That Year’ के चयन ने इस जोड़ी की ओर फिर ध्यान खींचा है।
‘हमारा शहर उस बरस’ मूल हिंदी में 1998 में प्रकाशित हुआ था। टिल्टेड ऐक्सिस प्रेस से इसका ब्रिटिश संस्करण 22 अप्रैल 2025 को आया। इस संस्करण में 448 पृष्ठ हैं। पुस्तक के केंद्र में एक ऐसा शहर है, जिसका सामाजिक वातावरण धार्मिक और वैचारिक विभाजन के कारण बदल रहा है। इस बदलाव का असर सार्वजनिक जीवन से आगे बढ़कर लोगों के निजी संबंधों और उनकी अभिव्यक्ति तक पहुँचता है।
कथानक के केंद्र में श्रुति, शरद और हनीफ़ हैं। श्रुति लेखिका है, जबकि शरद और हनीफ़ विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ाते हैं। तीनों अपने आसपास बदलते वातावरण को समझने और उसके विरुद्ध अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं। विश्वविद्यालय के निकट फैलता आश्रम, उसके भाषण और पहचान की राजनीति शहर के वातावरण को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे बाहर का तनाव परिचित लोगों के बीच भी जगह बनाने लगता है।
पुस्तक का सार इसी क्रमिक बदलाव में खुलता है। जिन लोगों के बीच पहले सहज बातचीत और मित्रता थी, उनके संबंधों में संदेह प्रवेश करने लगता है। शरद और हनीफ़ की निकटता पर भी सांप्रदायिक पहचान की छाया पड़ती है। दोनों लेखों, रिपोर्टों और पत्रों के माध्यम से हस्तक्षेप करना चाहते हैं। श्रुति अपने समय को कथा में उतारने का प्रयास करती है, लेकिन उसके सामने कठिनाई है कि बिखरते जीवन को किस रूप में लिखा जाए। एक अनाम कथावाचक बातचीत, दृश्य और विचारों के टुकड़े सहेजता चलता है। उपन्यास की बिखरी हुई संरचना भी इसी अस्थिर अनुभव से जुड़ती है।
शरद के पिता दद्दू इस कथा में विशेष उपस्थिति रखते हैं। प्रकाशक उन्हें बढ़ते अँधेरे के बीच आशा का सहारा बताता है।पात्रों की यह स्थिति एक गहरी चिंता की ओर ले जाती है—जब समाज में अविश्वास बढ़ता है, तब हमारी समझदारी, शिक्षा और वर्षों की आत्मीयता कितनी सुरक्षित रह पाती है?
मेरे लिए इस विषय का सबसे बेचैन करने वाला पक्ष यही है। शहर का बिगड़ना हमेशा किसी बड़ी घटना से शुरू हुआ दिखाई नहीं देता। कभी बातचीत का लहजा बदलता है, कभी परिचित व्यक्ति को देखने का ढंग। धीरे-धीरे मनुष्य के नाम और उसकी पहचान के बीच उसका व्यक्तित्व छूटने लगता है। ऐसे विषय पर लिखी पुस्तक हमें अपने व्यवहार पर भी ठहरकर सोचने का अवसर देती है।
इस वर्ष वारविक पुरस्कार को 37 भाषाओं से 164 प्रविष्टियाँ मिलीं। लंबी सूची में 12 भाषाओं की कृतियाँ शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, पुरस्कार के दस वर्ष के इतिहास में यह सबसे व्यापक भागीदारी है। छोटी सूची 26 अक्टूबर 2026 को घोषित होगी और विजेता की घोषणा 16 नवंबर को लंदन में होनी है। फिलहाल, 21 अक्टूबर तक ‘Our City That Year’ लंबी सूची में शामिल है।
आगे का परिणाम जो भी हो, यह खबर हिंदी पाठकों को अपनी ही भाषा की एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक की ओर लौटने का अवसर देती है। मेरी इच्छा है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मान की चर्चा के साथ मूल हिंदी पुस्तक भी नए पाठकों तक पहुँचे। हम उसे पढ़ें, उसके पात्रों की उलझनों को समझें और उन प्रश्नों से बचकर न निकलें जो वह हमारे सामने रखती है। साहित्य के लिए इससे अधिक सार्थक क्या होगा कि किसी शहर की लिखी हुई कहानी हमें अपने शहर, अपने संबंधों और अपने भीतर बची मनुष्यता की खबर लेने को प्रेरित करे।